कैसा रहेगा आपका दिन आज स्वयं देखें

 

जीवन मंे हमें बहुत महŸवपूर्ण फैसले करने होते हैं। जिसके लिये दिन शुभ है या अशुभ, यह जानना जरूरी हो जाता है। पत्रिकाओं में अकसर हम अपना भविष्य पढ़ते हैं। इस लेख के माध्यम से आप किसी हद तक अच्छे या बुरे दिन को जानकारी खुद पायेंगे।

हमारे दैनिक जीवन पर चन्द्रमा का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, क्यों कि चन्द्रमा पृथ्वी का सबसे निकटतम ग्रह है और बहुत गतिशील है।

चन्द्रमा मन, यात्रा, और जल का कारक है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूरे निखार पर होता है। अक्सर मैने देखा है कि पूर्णिमा के दिन व्यक्ति खुश रहते हंै। इसी के विपरीत अमावस्या के दिन मन में टेनशन, परेशानी, दुविधा अधिक रहती है। किसी ने सही कहा है मन खुश तो सब खुश।

जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में गोचर कर रहा होता है वह आपकी जन्म राशि है। चन्द्रमा की अपनी राशि है कर्क, उच्च राशि है वृष और नीच राशि है वृष्चिक। चन्द्रमा एक राशि में ढ़ाई दिन या 54 घण्टे रहता हैं।

अगर आपको अपनी जन्म तिथि या समय का ज्ञात नहीं है तो आप अपने नाम से भी अपनी राशि जान सकते है।

भारतीय ज्योतिष में चन्द्रमा का विशेष महŸव है। जन्म कुण्डली के बाद चन्द्र कुण्डली को विशेष महŸव दिया जाता है।

आपका दिन कैसा होगा।

आपका दिन कैसा होगा, यह जानने के लिए अपनी चन्द्र राशि देखें। वह आपके चन्द्रमा का प्रथम भाव है। उससे अगला भाव दूसरा, फिर तीसरा। इस प्रकार कुण्डली के बारह भाव होते है। और गिनती ऐन्टी क्लाक बाइस होेती है।

अब आपने जिस दिन की गणना करनी है उस दिन देखिये चन्द्रमा कहाँ गोचर कर रहा है। उदाहरण- आपकी चन्द्र राशि सिंह है और चन्द्र उस दिन वृष राशि में गोचर कर रहा है जो कि आपकी चन्द्र कुण्डली का दसवा भाव है।

सभी भावों का फल

  1. प्रथम भाव में चन्द्रमा का गोचर भाग्योदय, प्रसन्नता और लाभ देता है।
  2. आपका दिन हानिकारक हो सकता है। मन में दुविधा, अशांति रहने की सम्भावना है।
  3. यात्रा से आपको लाभ मिल सकता है। भाई बहनों के साथ समय व्यतीत कर सकते हैं।
  4. घर में कलह हो सकती है। विदेश से लाभ, परन्तु खर्च अधिक हो सकता है।
  5. बच्चों के कारण परेशानी या दुविधा आ सकती है। सम्मान में वृद्धि हो सकती है।
  6. शत्रु पर विजय होगी। नौकरी में लाभ मिलने की सम्भावना हो सकती है। शिक्षा में व्यवधान।
  7. दिन अच्छा रहेगा। व्यापार में फायदा हो सकता है। पत्नी के साथ सम्बन्ध अच्छे हो सकते हैं।
  8. दिन कष्टकारी रहेगा। सेहत के लिये खराब हो सकता है। सावधानी रखें।
  9. धन से लाभ। यात्रा का योग हो सकता है। सरकारी कार्यों में सचेत रहने की आवश्यकता है।
  10. खुशी भरा दिन, शुभ सन्देश मिल सकता है।
  11. परिश्रम के बाद कार्य सफल हांेगे। मनोकामना पूरी हो सकती है।
  12. व्यय बढ़ेगा, दिन परेशानी भरा हो सकता है। सतर्कता की आवश्यकता है।

नोटः- यह भविष्यवाणी जन स्तर पर है। व्यक्ति विशेष की कुण्डली पर अन्य ग्रहांे के गोचर का भी प्रभाव होता है जिसके कारण गणना बदल जाती है, जिसके कारण उपरलिखित सम्भावनाये बदल भी सकती हैं। सही भविष्य जानने की लिये किसी ज्योतिष विशेषज्ञ की राय लें।

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निशा घई

ज्योतिष्य आचार्य

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वक्री शनि द्वारा भाग्योदय

अजीब लगता है यह सुन कर कि वक्री शनि भी भाग्योदय का कारण बन सकता है। अभी तक तो सभी ज्योतिषीं शनि के नाम से डराते थे? अब अचानक शनि कैसे जीवन में उत्थान दे सकता हैं?

शनि 25 मार्च के सायं 3ः15 मिनट पर वक्री हुआ था। नक्षत्र है ज्येष्ठा और राशि हैं वृष्चिक शनि मार्गी हो रहा है, 12 अगस्त को अनुराधा नक्षत्र और वृष्चिक राशि में?

 

शनि के बारे में आम धारणा।

ग्रह शनि के बारे में आम धारणा है कि शनि ग्रह चाहे तो राजा बना दे या रंक। जिसकी जन्मकुण्डली में शनि बहुत अच्छी स्थिति में होता है उसे शनि विशेष हानि नहीं पहुँचाता बल्कि लाभ ही पहुँचाता है। जिन जातको की कुण्डली में शनि, नीच स्थिति पर होता है, उन्हे शनि से हानि होती है। परन्तु यह हानि जीवन भर नहीं रहती, क्योंकि हमारे जीवन में दशा और गोचर का भी महत्व होता है।

कुण्डली में शुभ शनि के प्रभाव।

उच्च स्थिति में बैठा शनि, अपने घर का या मूल त्रिकोण राशि में बैठा शनि अच्छा माना जाता है। एैसा व्यक्ति भाग्यशाली होता है, स्थिर, गम्भीर बुद्धिमान होता है। जातक की आयु लम्बी होती है। उसकी दार्शनिक प्रवृŸिा होती है व्यक्ति परिश्रमी होता है और धन अर्जित करता है। नौकरी में उच्च पद पर पहुँचता है। हस्तरेखा विज्ञान में भी अच्छी शनि रेखा (भाग्य रेखा) का बहुत महŸव है।

कुण्डली में अशुभ शनि का प्रभाव।

शनि अगर नीेच स्थिति में है तो व्यक्ति शंकालु निराशावादी चापलूस, अलगाव वादी बनता है। पढ़ने में उसका मन नहीं लगता। नाक और सांस सम्बन्धी तकलीफ से ग्रस्त रहता है।

आजकल शनि कहां गोचर कर रहा है?

आजकल शनि वक्री हो कर वृष्चिक राशि में मंगल के साथ गोचर कर रहा है। मेष और सिंह राशि की ढैया और तुला वृष्चिक एवम धनु राशि पर साढ़ेसाती चल रही है।

 

वक्री शनि का प्रभाव।

जिन जातकांे की जन्मकुण्डली में शनि शुभ स्थान पर है या गोचर अच्छा चल रहा है उनके लिये वक्री शनि परेशानी लायेगा। उन्हे पैरों की तकलीफ, कार्यो में रूकावट, जोड़ों का दर्द, नौकरी में परेशानी होगी। धातु, लोहा, बहुमूल्य रत्न, अनाज का व्यापार करने वाले जातकांे के लिये यह समय अस्थिरता का रहेगा।

वक्री शनि किस के लिये शुभ।

जिन जातकों की कुण्डली में शनि अशुभ भाव में स्थित है अथवा गोचर में अशुभ चल रहा है, उनके लिये यह समय शुभ रहेगा। नौकरी में तरक्की की सम्भावना बढ़ेगी, धन का लाभ होगा क्रूड आयल, शेयर बाजार, कोयला स्टील सम्बधी व्यापारियों को फायदा होगा।

शनि के दुष्प्रभाव कम करने के उपाय।

ऽ              शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिये 7 प्रकार के अनाज व दालों को मिश्रित करके पक्षियों को खिलायें।

ऽ              बैगनी रंग का रूमाल जेब में रखें।

ऽ              शनि मंदिर में शनि की मूर्ति पर तिल या सरसों का तेल चढ़ायंे।

ऽ              सवा पांच रŸाी का नीलम या उपरत्न नीली को ताँबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर पहनें।

ऽ              शनि यंत्र की रोज उपासना करें।

ऽ              फिरोजा रत्न गले में धारण कर सकते हैं।

शनि की साढ़ेसाती के उपाय।

ऽ              शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल से उंगूठी बनवायें। उसे तिल के तेल में सात दिन तक रखें। शनि मंत्र को 23000 जाप करंे। शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय धारण करें।

ऽ              शनिवार को व्रत रखें। सांयकाल में ही भोजन करें।

ऽ              शनि बीज मंत्र का 23000 जाप सांयकाल को करें, ऊँ प्रां प्री सः श्नैश्चराय नमः, का

ऽ              बेसन या छोले से बने पदार्थ गरीबों को खिलायें।

 

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मकर संक्रांति देवताओ का दिन

 

खुशी और समृद्धि का व्यौहार मकर संक्रांति, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इस वर्ष मकर संक्राति 15 जनवरी को मनाया जायेगा। इस दिन सूर्य उरायण हो जाता है। मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व उत्तरायण के अविधि काल को देवताओं का दिन कहते हैं।

मकर संक्रांति को देवताओं का प्रभातकाल कहते हैं। गीता में लिखा है कि जो व्यक्ति उत्तरायण में शरीर का त्याग करता है, वह श्री कृष्ण के परम धाम में निवास करता है। पुराणों में इस दिन गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इस तिथि पर स्नान व दान करना बड़ा पुण्यदायी माना गया है। इससे जीवन और आत्मा के कारक सूर्य देव का प्रभातकाल कहते हैं।

गीता में लिखा है कि जो व्यक्ति उत्तरायण  में शरीर का त्याग करता है, वह श्री कृष्ण के परम धाम में निवास करता है। पुराणों में इस दिन गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इस तिथि पर स्नान व दान करना बड़ा पुण्यदायी माना गया है। इससे जीवन और आत्मा के कारक सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इस दिन सुबह पवित्र नदी से स्नान कर तिल और गुड़ खाने की परम्परा है। मकर संक्रांति पर तिल का विशेष महत्व है। प्रचलित है कि तिल का दान करने से घर में समृद्धि आती है।

 

यह त्यौहार हर प्रदेश में अलग- अलग परम्परा से मनाया जाता है-

 

मकर संक्रांति पर तिल का विशेष महत्व है। प्रचलित है कि तिल का दान करने से घर में समृद्धि आती है।

उत्तर प्रदेश में खिचड़ी बना कर सूर्यदेव को भोग लगाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में फसलें पक जाने के उपलक्ष में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। आसाम में बिहु और दक्षिण भारत में पोंगल के रूप में मनाते है। महाराष्ट्र में नवविवाहित स्त्रियाँ अपनी प्रथम संक्रांति पर तेल, कपास और नमक का दान सौभाग्यवती स्त्रियों को करती है।

 

मकर संक्रांति पर सूर्य की जल चढ़ाते हुऐ इस मंत्र का 11 बार उच्चारण करना चाहिये।
सूर्याय नमः आदित्याय नमः सप्ताचिर्ष नमः

 

 
अन्य मंत्र- ऊँ घृणि सूर्याय नमः 11 बार इन मंत्रों का उच्चारण कर अपनी मनोकामना माँगे तो सूर्य देव आपकी मनोकामना जरूर पूरी करेंगे।

अर्घ के जल में क्या मिलाये – गुड़ और चावल, मकर संक्रांति पर क्या दान करे – कंबल, गुड़, तिल खिचड़ी का दान जीवन में भाग्य लाता है।

 

शुभ मुहूर्त-

वर्ष 2016 का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक है।